ग्रन्थ किनके लिए हैं?
क्या ग्रन्थ गलत हैं? क्या पंथ गलत हैं? क्या सारे शरीरधारी गुरु गलत हैं? साहबश्री ने एक उदाहरण दिया है… […]
क्या ग्रन्थ गलत हैं? क्या पंथ गलत हैं? क्या सारे शरीरधारी गुरु गलत हैं? साहबश्री ने एक उदाहरण दिया है… […]
एक बार एक चालाक गुरु ने एक सीधे सादे शिष्य को फंसा लिया, यह कहकर कि तुम मेरी सेवा करो,
किसी भी दुःख का कारण, मेरी समझ से है-अनुचित अपेक्षा। जिसका कारण है,समझ की कमी। उचित-अनुचित का निर्णय करने के
स्व में स्थित होना ही स्वास्थ्य है। भू भुवः स्वस्थूल सूक्ष्म कारण इस प्रकार स्व का अर्थ हुआ वह सूक्ष्मातिसूक्ष्म
अक्सर लोग कहते हैं कि सनातन धर्म। जैसे कि कई धर्मों में से एक धर्म, सनातन धर्म भी है। कुछ
एक मित्र ने मैसेंजर पर पूछा ॐ नमः शिवाय क्यों नहीं?केवल नमः शिवाय क्यों? मैंने कोशीश कीगुरू दया से… इस
एक मास्टर साहब, जो प्राथमिक विद्यालय में पढ़ाते थे अपने बेटे के साथ स्कूल निकल रहे थे।बेटा भी उन्हीं के
अक्सर बाहर से समृद्ध दिखने वाले लोग, अंदर से दरिद्र होते हैं। ऐसा नहीं है कि बाहर से समृद्ध दिखने
विगत 1 अक्टूबर 2015 को मैं एक गुरुभाई से मिला। नाम है सुरेन्द्र गुरुभाई।घर-पोठिया, फारबिसगंज। उनसे मिलने की इच्छा पिछले
गुरु वही हो सकते हैं,जिनमें गुरूत्त्व हो। ईश्वर से अधिक गुरूत्त्व किसमें हो सकता है? गुरु का एक अर्थ भारी