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आराध्य

आराध्य या इलाह का अर्थ होता है, ध्यान देने योग्य, अर्थात खयाल में लाने लायक। ग्रंथों में कहा गया है,

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भ्रष्टाचार

भ्रष्टाचार क्या है?उपयुक्त आचरण से भ्रष्ट हो जाना अर्थात पतित हो जाना अर्थात नीचे गिर जाना भ्रष्टाचार है। जैसे कि,

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ज्ञान और समझ

जिज्ञासा: वागात्मक ज्ञान और बोधात्मक ज्ञान में क्या अंतर है? प्रयास: जहाँ तक मेरी समझ है,ज्ञान जब बोध में उतर

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क्यों नहीं मांगेंगे???और सुनता कौन है?जिससे मिलता है, उसी से न माँगा जायेगा? हाँ साथ में यह भी दया मांगना

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जहाँ तक मुझे लगता है, गुरु कभी शिष्य को नहीं छोड़ते। जब छोड़ते ही नहीं तो फिर से अपनाने का

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प्रणामजरूर जिज्ञासा कीजियेगुरू की दया से कोशीश करूँगावैसे साहबश्री के करीब तो सभी गुरू भाई-बहन रहते हैं

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