sadhya aur sadhan साध्य और साधन
कुछ लोग कहते हैं साधन से कोई फर्क नहीं पड़ता,साध्य सही होना चाहिये। खासकर आध्यात्मिक चर्चा जब भी होती है, […]
कुछ लोग कहते हैं साधन से कोई फर्क नहीं पड़ता,साध्य सही होना चाहिये। खासकर आध्यात्मिक चर्चा जब भी होती है, […]
आराध्य या इलाह का अर्थ होता है, ध्यान देने योग्य, अर्थात खयाल में लाने लायक। ग्रंथों में कहा गया है,
भ्रष्टाचार क्या है?उपयुक्त आचरण से भ्रष्ट हो जाना अर्थात पतित हो जाना अर्थात नीचे गिर जाना भ्रष्टाचार है। जैसे कि,
जिज्ञासा: वागात्मक ज्ञान और बोधात्मक ज्ञान में क्या अंतर है? प्रयास: जहाँ तक मेरी समझ है,ज्ञान जब बोध में उतर
Gyanendra Ji.Saheb kai baar kahte hain ki Guru ka message aata hai. Hun ye jaanna chaahte hain ki Iss message
क्यों नहीं मांगेंगे???और सुनता कौन है?जिससे मिलता है, उसी से न माँगा जायेगा? हाँ साथ में यह भी दया मांगना
sabse pahle to samay dene ke liye bahut bahut dhanyawaad.aapne sahi kahaa ki mujhe waapas apne paas bulana v guru
जहाँ तक मुझे लगता है, गुरु कभी शिष्य को नहीं छोड़ते। जब छोड़ते ही नहीं तो फिर से अपनाने का
dhanyawaad.main shiv ko bahut maanti hoon shuru se aur shiv ko apna guru banaya 6 saal pahle. koi swaarth nahi
प्रणामजरूर जिज्ञासा कीजियेगुरू की दया से कोशीश करूँगावैसे साहबश्री के करीब तो सभी गुरू भाई-बहन रहते हैं