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शिव पुराणःशिवपुराण की रूद्र संहिता में उल्लेख मिलता है कि महादेव जी ने कहा,, विधाता, मैं जन्म और मृत्यु की
जहां सत्ता है, वहीं शक्ति है।जहां शक्ति है, वहीं सत्ता है। जो पंच ज्ञानेन्द्रियों की पकड़ में नहीं आये, उसे
मनुष्य जो चाहता है, वो हो नहीं पाता और जो नहीं चाहता वो हो जाता है।जैसे कि मनुष्य बीमार नहीं
अध्यात्म जगत में जो मंत्रों का विज्ञान बना। मानव का धरती के आकर्षण में जीना स्वभाव है उसकी अपनी शारीरिक जरूरतों
प्रत्येक मनुष्य के जीवन में एक आध्यात्मिक गुरु की आवश्यकता होती है. गुरु का काम होता है परमात्मा से सम्बन्ध