मानवता का असली संकट: चेतना का अधःपतन | क्या शिव गुरु की शिष्यता ही इसका समाधान हो सकता है?
“आप अनंत नहीं हो सकते, लेकिन आप शून्य तो हो सकते हैं।आप शून्य हो जाइए, फिर आपके अंदर से अनंत […]
“आप अनंत नहीं हो सकते, लेकिन आप शून्य तो हो सकते हैं।आप शून्य हो जाइए, फिर आपके अंदर से अनंत […]
चंद्र के रूप में, सूर्य के रूप में, केतु के रूप में, राहु के रूप में, मंगल के रूप में,
🔱 आपके काम आ सकूं सरकार! (इसमें मेरा क्या जा रहा है!) #मेरे_गुरु_शिव #दया_कर_दीजिए क्या यह वाक्य केवल विनम्रता है?
“सब डमरू वाले की करनी है।” न कुछ आप कर रहे हैं, न कुछ मैं कर रहा हूं। “दुनियां एक
क्या यह संयोग है, कर्म है या चेतना की योजना? ।। प्रणाम ।। क्या आपने कभी सोचा है — जब
✨एक वाक्य, जो साधना बन जाए “मैं उस शिव को प्रणाम करती हूँ, जो मुझमें हैं और जिनमें मैं हूँ।”
।।प्रणाम।। आज का युग समस्याओं से भरा हुआ नहीं है, बल्कि समझ के अभाव से जूझ रहा है। युद्ध, तनाव,
“सभी गुरु ठग नहीं होते, लेकिन कुछ ही गुरु होते हैं जो ठग नहीं हैं। और दुर्भाग्य यह है कि
100, 200 या 400 वर्षों की प्रतीक्षा नहीं— चार युगों के पश्चात धरती पर वह दुर्लभ अवसर आता है, जब